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अल्लू ने अक्सर अपने बदमाश दोस्तों की तरह स्कूल में हलचल मचाई, लेकिन उस दिन कक्षा की खिड़की से बाहर देखता रहा।
वह बाहर हो रहे खेल को देख रहा था, जो उसे कहीं न कहीं लग रहा था कि उसकी ज़िन्दगी से जुड़ा है। शिक्षक ने उसे बार-बार देखने और ध्यान देने को कहा, पर उसका ध्यान कक्षा से कहीं दूर था।
अल्लू के मन में एक उलझन थी। वह अपने सपनों को लेकर असमंजस में था। उसे लगता था कि स्कूल के नियमों से उसका जुनून दब रहा है। वह किताबों के पन्नों में छुपा हुआ तो था, पर उसकी हस्तियाँ कहीं दूर नाच रही थीं।
विद्यालय की जिंदगी, जो अक्सर अनुशासन और पढ़ाई का नाम माना जाता था, उसके लिए एक अधेरे कमरे की तरह थी, जिसमें वह खुद को बंद महसूस करता था। वह चाहता था कि कोई खिड़की से बाहर की दुनिया को समझे।
उस दिन कक्षा के अंत में, उसने अपनी लेखनी उतार दी और एक छोटी सी डायरी निकाली। उसने लिखा - "यहाँ हर दिन एक नई कहानी होती है, लेकिन मैं वह कहानी नहीं जो मैं जीना चाहता हूँ। शायद बाहर की हवा में मेरी असली कहानी छुपी है।"
अल्लू की यह लिखावट शायद कुछ लोगों को समझ में न आई, लेकिन उसके लिए यह शब्दों का सफर था, अपने आप को समझने की यात्रा।
शायद कभी वह बाहर की दुनिया में जाकर अपनी कहानी खुद रचेगा, लेकिन आज के लिए, कक्षा की खिड़की से बनी इस दूरी में उसने खुद से दोस्ती की।