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सुबह का सूरज धीरे-धीरे खिड़की से कमरे में दाखिल हुआ। नीतू ने देखा कि उसका अलार्म बजना भूल गया, और अब वह ऑफिस के लिए बहुत देर हो चुकी थी। बिना नहाए, वह जल्दी-जल्दी कपड़े पहनने लगी।
उसके मन में चिंता थी कि बॉस को देर से आने पर क्या जवाब देगी, लेकिन सबसे ज्यादा उसे ऑफिस की उस नई मीटिंग की टेंशन थी, जिसे उसने ठीक से समझा भी नहीं था।
रास्ते में, नीतू की कार अचानक रोक गई। उसने देखा कि पेट्रोल खत्म हो चुका है। पेट्रोल पंप तक पैदल जाना पड़ रहा था। इस बीच, उसने मोबाइल से ऑफिस कॉल किया, अपनी स्थिति बताई।
पेट्रोल लेने के लिए वह बाहर निकलते समय, एक बूढ़े आदमी से टकरा गई, जो अपने कुत्ते के साथ सड़क पर धीमी चाल से चल रहा था। अचानक, कुत्ते ने नीतू के जुत्ते पर जाकर काट लिया। दर्द के बावजूद, नीतू ने गहरी सांस ली और खुद को संभाला।
पेट्रोल लेकर लौटते समय उसने सोचा कि जीवन में कभी-कभी चीजें ठीक से नहीं चलतीं, लेकिन हमें खुद को संयमित रखना होता है। वह ऑफिस पंहुची तो बॉस ने आकर कहा, "तुम्हारी ईमानदारी के लिए धन्यवाद, वक्त पर आने की बजाय सच्चाई बताने के लिए।"
यह दिन नीतू के लिए इस बात का सबक बन गया कि फंसने की बजाय परिस्थिति को स्वीकार करने में ही समझदारी है। उसने जाना कि हर चीज़ पूरी तरह नियोजित नहीं होती, पर हम अपनी प्रतिक्रिया चुन सकते हैं।