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हवा इतनी तेज़ थी कि अर्पित का बैग उड़ने लगा। वह शहर के पुस्तकालय के पीछे एक पुराने पार्क में था, जहां हाथ से लिखी किताबों की दुकानें थीं। उसकी नज़र एक किताब पर पड़ी जो तिल-तिल जल रही थी।
अर्पित ने सावधानी से किताब उठाई। उसके पन्नों पर कुछ पुराने अक्षर थे, जो आसानी से समझ में नहीं आते थे। उसने सोचा कि यह कोई सामान्य किताब नहीं, शायद कोई छिपा संदेश है।
कुछ पलों में, उसने किताब के पीछे छिपे एक नक्शे को देखा। नक्शा एक रहस्यमय स्थान की ओर इशारा कर रहा था जो शहर के बाहर, जंगल के बीच था। बिना किसी योजना के, अर्पित ने उस जगह जाने का फैसला किया।
जंगल में घुसते ही अर्पित को अजीब-सी आवाज़ें सुनाई दीं। उसका दिल तेज़ धड़कने लगा लेकिन वह पीछे हटना नहीं चाहता था। नक्शे पर चिह्नित स्थान पर पहुँचकर उसे एक पुराना कुआँ मिला। कुएँ के अंदर कुछ चमक रहा था।
अर्पित ने धीरे-धीरे नीचे देखा और एक छोटा डिब्बा पाया। वह डिब्बा खोलते ही उसमें से एक पत्र निकला, जिसमें लिखा था, "जो इस संदेश को पढ़ रहा है, वह उस समय के लिए जिम्मेदार है जिसमें हम जीते हैं। सोच समझकर कदम बढ़ाओ।"
यह संदेश उसे डराने वाला भी था और विचारों में डालने वाला भी। आखिर यह कौन था जिसने यह संदेश छोड़ा? क्या यह भविष्य की कोई चेतावनी थी? अर्पित ने वहां से जल्दी वापसी की, लेकिन उसके मन में अनेक सवाल थे।
वह दिन जादू की तरह बीत गया, पर उस रहस्यमय संदेश ने उसकी सोच और नजरिए को बदल दिया। वह समझ गया कि कुछ कहानियाँ खत्म नहीं होतीं, वे बस छिप जाती हैं, 기다ниं हैं कि कोई उन्हें खोजे।