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शाहरुख लगभग हर रविवार को अपने गाँव के छोटे से मैदान में क्रिकेट खेलता था। लेकिन उसे असली बोलिंग का शौक था, जो उसने कभी किसी को नहीं बताया।
एक दिन, गाँव में एक नई क्रिकेट टीमें आयी। वे शहर से आए थे, और उनकी बोलिंग बहुत तेज और कठिन थी। शाहरुख ने महसूस किया कि वह उनके मुकाबले बहुत धीमा और कमजोर है। यह बात उसे परेशान करने लगी।
अगले सप्ताह, शाहरुख ने फैसला किया कि वह बोलिंग में सुधार करेगा। उसने हर दिन खेलने के बाद अकेले अभ्यास किया। वह गेंद को अलग-अलग तरीके से फेंकने की कोशिश करता, ताकि बल्लेबाजों को परेशान कर सके।
लेकिन दोस्तों ने कहा, "शाहरुख, तुम क्यों इतना समय बोलिंग में लगाते हो? टीम में बल्लेबाज बनो, वही ज्यादा ज़रूरी है।" बहुत बार उसने भी सोचा कि क्या वह अपने दम पर सफल होगा?
एक रविवार को फिर से शहर वाले आए। मुकाबला शुरू हुआ। शाहरुख की बोलिंग कुछ खास असर नहीं कर रही थी। उसे बहुत झटका लगा। लेकिन उसने हार नहीं मानी और अपनी पूरी ताकत से गेंदबाजी की। अचानक, उसने एक बॉल ऐसी फेंकी जिससे एक बल्लेबाज आउट हो गया।
टीम के सभी खिलाड़ियों ने उसकी तारीफ की। वह जानता था कि जीत के लिए केवल अच्छा बोलर होना जरूरी नहीं, बल्कि धैर्य और लगन भी चाहिए। दिन खत्म होते-होते शाहरुख की सोच में बदलाव आया - सफलता एक बार में नहीं, बल्कि निरंतर प्रयासों से आती है।
शहर वालों ने भी माना कि शाहरुख का बोलिंग से प्यार और मेहनत काबिले तारीफ है। शायद अगले मैच में कुछ नया दिखेगा। इस लड़के की अनकही कहानी आगे बढ़ रही थी, और केवल गेंद ही नहीं, उसकी उम्मीदें भी तेजी से घूम रही थीं।
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