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सुबह की हल्की धूप में मोहन अपनी सब्ज़ी की दुकान सजाने में व्यस्त था। यह उसकी रोज़ की सुबह की शुरुआत थी, जिसमें वह अपनी सब्ज़ियों को ताज़ा और रंग-बिरंगा दिखाने की कोशिश करता।
आज उसने महसूस किया कि ग्राहक कम आए हैं। मोहन सोचने लगा कि क्या उसकी सब्ज़ियाँ ठीक से साफ़ या अच्छी तरह से रखी नहीं हैं। वह जल्दी-जल्दी दुकान की सफाई में लग गया।
फिर भी, थोड़े समय बाद एक युवा महिला आई और भरे हुए थैले लिए दुकान से बाहर निकली। देखकर मोहन को आश्चर्य हुआ क्योंकि उसके कई पुराने ग्राहक आज नहीं आए। उसने महिला से पूछा कि क्या सब कुछ ठीक था?
महिला ने बताया कि पास वाले नए सुपरमार्केट में आज बड़ी छूट चल रही है, इसलिए वो घर का सारा सामान वहीं से ला रही हैं। मोहन ने सोचा कि अब उसकी दुकान की स्थिति कैसी होगी अगर सभी ग्राहक वहीं जाएं।
दिनभर वह इस विषय में सोचता रहा। कुछ समय बाद, वह अपने पड़ोसी की बात सुनकर मुस्कुराया, जिसने कहा, "मोहन, तुम्हारी दुकान का अपना एक खास तरीका और प्यार है, सुपरमार्केट से वो नहीं मिलेगा।"
लेकिन मोहन को पता था कि सब्ज़ियों की बिक्री लगातार नहीं रहेगी, और बदलाव के लिए उसे कुछ नया करना होगा। शायद अच्छी गुणवत्ता के साथ नए तरीके अपनाने होंगे। पर वह जल्दी में कोई बड़ा फैसला नहीं करना चाहता था।
शाम को दुकान के दरवाज़े पर, एक बच्चा मिठास भरी निगाहों से सब्ज़ी देखकर मुस्कुराया। मोहन ने सोचा, "शायद कुछ चीजें जिन्दा रहती हैं क्योंकि वे लोगों के दिलों में होती हैं, ना कि सिर्फ छूट और बड़ी दुकानों में।"
यह सोचकर उसे कुछ संतोष मिला, फिर भी वह जानता था कि कल क्या होगा, ये सिर्फ समय बताएगा। आज की उलझन के साथ ही मोहन ने अपना दिन खत्म किया।
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