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पिछले हफ्ते, गीता ने बाजार से नया टीवी लाया। टीवी बड़ा था और रंग बहुत अच्छे थे। वह खुश थी कि अब परिवार के साथ फिल्में देख सकेगी।
टीवी लगाते ही, उसने चैनल बदला लेकिन अचानक से एक अजीब सी आवाज़ आने लगी। आवाज़ में जैसे कोई गाना चल रहा हो, पर चैनल पर कुछ नहीं था। गीता ने रिमोट दबाया, पर आवाज़ कम नहीं हुई।
वह सोचने लगी कि शायद टीवी खराब है। उसने पड़ोसी से मदद मांगी। पड़ोसी ने कहा, "क्या आपने टीवी के पास कोई और चीज़ लगाई है?" गीता ने देखा, तो पता चला कि टीवी के पास उसका पुराना रेडियो रखा था। रेडियो तेज़ आवाज़ में चल रहा था, इसलिए टीवी में भी आवाज़ आ रही थी।
गीता ने रेडियो बंद किया और टीवी फिर से साफ आवाज़ में फिल्म चला। पर उसे हंसी भी आई कि बड़े टीवी के साथ छोटी-छोटी बातें ही समस्या बनती हैं।
उसने सोचा कि कभी-कभी नई चीज़ों के साथ पुरानी चीज़ें मिल जाती हैं, और तभी मज़ाक बन जाता है। टीवी की वजह से वो बहुत खुश थी, लेकिन उस दिन वह समझी कि सब बातों को ध्यान से देखना ज़रूरी है।
एक शाम गीता ने टीवी के सामने बैठकर सोचा, "नई चीज़ें नई परेशानी नहीं बनतीं, बस हमें समझदारी से देखना चाहिए।" इसका कोई बड़ा हल तो नहीं था, लेकिन उसने उस दिन की बात को याद रखा।