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प्रियंका को नई जगहों पर जाना बहुत पसंद था। एक दिन उसने अपने गाँव के पास एक ऊँचा पहाड़ देखा। वह सोचने लगी, "क्या मैं उस पहाड़ तक जा सकती हूँ?"
सुबह जल्दी, प्रियंका नयी झोली लेकर पहाड़ की ओर चल पड़ी। रास्ते में कई छोटे-छोटे रास्ते थे। वह कुछ मुश्किलों से बचते, कुछ पेड़ और फूलों को देखती हुई आगे बढ़ी।
पहाड़ के बीच में एक पुराना पत्थर था, जो दिखने में बहुत बड़ा और मजबूत था। प्रियंका ने सोचा कि शायद यह कोई खास जगह होगी। वह पत्थर के पास जाकर बैठ गई। वहाँ से नीचे घाटी का नज़ारा बहुत सुंदर दिख रहा था।
तभी आस-पास कुछ काले बादल घिरे। हवा तेज़ हो गई। वह थोड़ी डरी, लेकिन डरने की बजाय उसने सोचा कि उसे जल्द ही अपने घर वापस जाना चाहिए।
जब वह वापस लौट रही थी, तो रास्ता असल में उससे थोड़ा अलग था। वह थोड़़ा खो गई। प्रियंका ने घबराने की बजाए आराम से सोचा और आस-पास के पेड़ों को देखकर सही रास्ता ढूंढ़ा।
घर पहुंचकर, उसने अपनी माँ को सारी बात बताई। माँ ने कहा, "तुमने बहुत बहादुरी दिखाई।" प्रियंका ने महसूस किया कि नई जगहों की खोज करने में मज़ा तो है, लेकिन सावधानी भी ज़रूरी है।
इस सफर में न तो कोई बड़ा खतरा आया, न कोई बड़ा दोस्त बना, बस प्रियंका ने अपने भीतर की हिम्मत को पहचाना। वह जानती थी कि अगली बार वह और भी बेहतर तैयारी के साथ बाहर निकलेगी।
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