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यह कहनी है राहुल की, जो शहर के बाहर एक बड़े जंगल की तरफ गया। वह बहुत उत्सुक था, क्योंकि उसने सुना था कि वहां बहुत सारे अनोखे जानवर हैं।
राहुल ने अपना बैग तैयार किया और सुबह जल्दी जंगल के लिए निकल पड़ा। रास्ता लंबा और मुश्किल था। पेड़ इतने ऊँचे थे कि सूरज की रोशनी पहुँचती नहीं थी।
रास्ते में उसने कुछ पक्षी देखे, और कुछ अनजान आवाजें सुनीं। अचानक, वह एक छोटी नदी के पास पहुंचा। नदी का पानी बहुत साफ था, लेकिन उस पर एक पुराना पुल टूट चुका था। राहुल को लगा कि अब आगे जाना मुश्किल होगा।
वह थोड़ा डर गया, लेकिन ठहरा नहीं। उसने पास के पेड़ों से कुछ लकड़ी निकालकर खुद एक छोटी सी नाव बनाई। फिर वह नदी पार कर गया। यह अनुभव उसे बहुत मज़ेदार लगा।
जंगल के दूसरी तरफ उसने कई रंग-बिरंगे फूल और एक चंचल बंदर देखा। लेकिन तभी बादल छा गए और बारिश शुरू हो गई। राहुल ने सोचा कि उसे वापस लौटना चाहिए।
वह तेज़ बारिश में भी जल्दी से अपना रास्ता ढूँढने लगा। घर पहुंचते-पहुंचते वह गीला तो था, लेकिन खुश भी। उसने सोचा, "कभी-कभी खतरे में भी मज़ा होता है।"
दिन की ज़िंदगी में हर सफ़र एक कहानी बन जाती है, और राहुल की यह कहानी कुछ अलग ही थी।
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