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राजू को मिठाई बहुत पसंद है। एक दिन वह बाजार गया। वह सोच रहा था, "आज मैं नई मिठाई खरीदूँगा।"
बाजार में उसने कई दुकानें देखीं। कुछ दुकानों पर गुलाब जामुन थे, तो कुछ पर रसगुल्ले। राजू ने सोचा, "मैं कौन सी मिठाई लूँ?"
उसने एक दुकान से सवाल किया, "यह मिठाई क्या है?"
दुकानदार ने जवाब दिया, "यह साफा मिठाई है, बहुत मीठी और नरम।"
राजू ने एक छोटा टुकड़ा लिया। पर उसने पहली बार कभी साफा मिठाई नहीं खायी थी। वह माँजने लगा, लेकिन उसे बहुत मीठा लगा। वह मुस्कुराया और उसने कहा, "मुझे मीठा मिठाई पसंद है, पर आज की यह थोड़ी ज्यादा है।"
फिर वह दूसरी दुकान पर गया। वहाँ उसने हलवा देखा। उसने कहा, "यह मिठाई देखो, सुनाने में अच्छा लगता है।"
राजू ने हलवा खाया। वह थोड़ा सादा और नरम था। राजू ने महसूस किया कि मिठाई का स्वाद अलग-अलग होता है, लेकिन सब की अपनी खासियत होती है।
उसने कुछ मिठाई खरीदी और घर लौट आया। घर पर उसने परिवार को दिखाया और कहा, "मैंने आज मिठाई का नया अनुभव किया। अगली बार मैं फिर से आकर नई मिठाई खाऊंगा।"
राजू ने मिठाई के स्वाद में खुशी पाई, और वह सोचता रहा कि जिंदगी में नए स्वाद मिलना अच्छा होता है, कभी-कभी मीठा ज्यादा भी अच्छा लग सकता है, पर संतुलन जरूरी है।