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आज सुबह, नीरज अपने घर के पास बाग़ में गया। वह बड़ी शांति महसूस कर रहा था। हवा ठंडी और साफ़ थी।
नीरज ने देखा कि पेड़ पर छोटे पक्षी गा रहे हैं। कुछ पत्ते हिल रहे थे, और सूरज की हल्की रोशनी बाग़ में फैल रही थी।
वह एक बेंच पर बैठ गया और गहरी सांस ली। "यह हवा मुझे तरोताजा कर रही है," उसने कहा।
कुछ देर बाद, एक छोटी चींटी उसके जूते पर चढ़ आई। नीरज थोड़ा हँसा और बोला, "तुम भी यहाँ स्वागत हो।"
नीरज ने अपने फोन से बाग़ की तस्वीरें लीं। वह सोचने लगा, "यह समय कहीं तेज़ नहीं भाग रहा। यहाँ सब कुछ धीरे-धीरे होता है।"
तभी, आसमान पर बादल दिखने लगे। नीरज ने जल्दी से अपने घर लौटने का निर्णय लिया।
घर जाते हुए, उसने महसूस किया कि सुबह की ये छोटी-छोटी बातें उसे खुश रखती हैं। शायद, उसे रोज़ाना ऐसे ही समय निकालना चाहिए।