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सुजाता हर दिन स्कूल जाती है। उसके स्कूल के बाहर एक बड़ी सफेद दीवार है।
एक दिन, स्कूल में नया काम मिला। शिक्षक ने कहा, "हम दीवार पर रंग-बिरंगा चित्र बनाएंगे।" सब बच्चे खुश थे।
सुजाता ने सोचा, "मैं किस रंग से शुरू करूँ?" उसने नीला रंग चुन लिया। पर उसे रंग लगाते समय हाथ गंदा हो गया। वह हँस पड़ी।
जब दीवार पर हर कोई रंग लगा रहा था, तब अचानक से बारिश होने लगी। सभी बच्चे अंदर भागे। दीवार पर रंग अधूरे रह गए।
सुजाता ने खिड़की से देखा। रंग पानी में धुंधला हो गए थे। उसने सोचा, "अब चित्र कैसा दिखेगा?"
अगले दिन स्कूल में सबने मिलकर फिर से रंग भरे। लेकिन इस बार, सबने धीरे-धीरे अपने हिस्से को पूरा किया। दीवार अब और सुंदर लगी।
सुजाता ने महसूस किया कि कभी-कभी चीजें योजना के अनुसार नहीं होतीं, लेकिन फिर भी खुश होना चाहिए। वह मुस्कुराई और स्कूल के बाहर रंगीन दीवार को देखा।