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मीरा छोटे शहर में रहती है। उसके शहर में हर साल बड़ा त्योहार आता है। यह त्योहार रंगों का होता है।
मीरा और उसके दोस्त त्योहार की तैयारियों में लगे थे। बाजार में रंग, फूल, और मिठाई की दुकानें लगी थीं। सब लोग खुश थे।
मीरा ने सोचा, "मैं सबसे सुंदर रंग पहनूँगी।" वह नीली और पीली रंग की साड़ी लेकर आई। लेकिन उसके पास रंग लगाने का कोई पता नहीं था।
त्योहार के दिन, बच्चे रंगों से खेल रहे थे। मीरा ने दूसरे बच्चों से पूछा, "क्या तुम मुझे भी रंग लोगे?" वे हँसे और मीरा के गालों और हाथों पर रंग लगाया।
मीरा ने पहली बार महसूस किया कि रंगों का मक्सद सिर्फ सुंदर होना नहीं, बल्कि सब के साथ मस्ती और खुश होना है। उसे कुछ रंग चेहरे से हटाने मुश्किल हुए, लेकिन वह खुश थी।
रात को, शहर के लोग मिलकर गीत गा रहे थे। मीरा ने देखा कि सब रंगों के बिना भी खुश थे। उसने सोच लिया कि त्योहार का असली मज़ा रंगों में नहीं, बल्कि साथ में है।